घूसखोरी और अपमान से टूटा शिक्षक, सुसाइड नोट में 48 लाख की वसूली का आरोप
चार पन्नों के पत्र में सीबीआई जांच की मांग, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
कृपा शंकर चौधरी
गोरखपुर। काम न होने, बार-बार अपमान और कथित घूसखोरी से मानसिक रूप से टूट चुके सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या से पहले जो सुसाइड नोट छोड़ा, उसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार पन्नों के इस नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के नाम, रकम और घटनाक्रम का सिलसिलेवार उल्लेख करते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।
तीन शिक्षकों से 48 लाख की वसूली का दावा
सुसाइड नोट के अनुसार, कृष्ण मोहन सिंह, ओंकार सिंह और अपर्णा तिवारी—तीनों से नियुक्ति और सेवा बहाली के नाम पर कुल 48 लाख रुपये की मांग की गई। शुरुआत में 20-20 लाख रुपये मांगे गए, बाद में सौदा 16-16 लाख पर तय हुआ।
नोट में उल्लेख है कि 27 जुलाई 2025 को पहली किस्त के रूप में तीनों ने 21 लाख रुपये दिए। दुर्घटना में घायल होने के कारण कृष्ण मोहन अपने हिस्से की रकम स्वयं नहीं दे पाए थे, जिसे उनके साथियों ने पहुंचाया।
दूसरी किस्त, रविवार को लिया गया पैसा
इसके बाद शेष 27 लाख रुपये की मांग की गई। सुसाइड नोट में दावा है कि यह रकम नवंबर 2025 में दी गई। कृष्ण मोहन ने लिखा है कि उन्होंने पत्नी के गहने गिरवी रखे, रिश्तेदारों से उधार लिया और बैंक से पैसा निकालकर 23 नवंबर को स्वयं कार्यालय पहुंचकर रकम दी, क्योंकि संबंधित लिपिक केवल रविवार को ही पैसा लेता था।
दावा यह भी है कि भुगतान के बावजूद न तो फाइल आगे बढ़ी और न ही सेवा बहाली हुई।
हाईकोर्ट आदेश के बावजूद प्रताड़ना
मृतक की पत्नी गुडिया सिंह के अनुसार, नियुक्ति समाप्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट से राहत मिलने के बावजूद अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया। उलटे रुपये न देने पर प्रतिकूल आदेश पारित करने की धमकी दी जाती रही।
20 फरवरी को बीएसए कार्यालय बुलाकर कथित रूप से अपमानित किया गया। उसी रात कृष्ण मोहन अत्यंत व्यथित थे और अगली सुबह उन्होंने जीवन समाप्त कर लिया।
प्रशासनिक कार्रवाई से विभाग में हड़कंप
यह मामला सामने आने के बाद देवरिया के शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए गए लिपिक संजीव सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जिसमें संयुक्त मजिस्ट्रेट और डीआईओएस को शामिल किया गया है। एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोष सिद्ध होने पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बीएसए पर भी कार्रवाई की तलवार
प्रकरण में बीएसए के विरुद्ध भी केस दर्ज हुआ है। जानकारों का मानना है कि गंभीर आरोपों के चलते निलंबन की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
गांव में पसरा मातम
कुशीनगर जनपद के हरैया बुजुर्ग गांव निवासी कृष्ण मोहन सिंह का शव जब पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। इकलौते छह वर्षीय बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। गांव और परिजनों का दर्द शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा।
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यह खबर सार्वजनिक हित से जुड़ी है। प्रस्तुत विवरण उपलब्ध तथ्यों, परिजनों के बयानों और जांच से जुड़ी सूचनाओं पर आधारित है। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।